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इमानदारी की बुनियाद पर बेइमानी का अम्पायर खड़ा कर रहे मंत्री जी

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बस्तीः योगी सरकार में शिक्षा मंत्री का रूतबा संभाल रहे सतीश द्विवेदी इन दिनों पार्टी की खूब किरकिरी करवा रहे हैं। विपक्ष और मीडिया दोनो हमलवार है, सवाल पर सवाल पूछे जा रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री टस्स से मस्स नही हो रहे हैं। यूं तो सीएम योगी की इमानदारी पर कभी सवाल नही उठे लेकिन बेइमान मंत्रियों पर कार्यवाही की बजाय उन्हे संरक्षण देने से उनकी छबि को गहरा नुकसान हो रहा है।

दरअसल शिक्षामंत्री का एक के बाद एक भ्रष्टाचार सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और समाजवादी पार्टी के लोग लगातार उनके बर्खास्तगी की मांग कर रहे हैं। ज़ीरो टॉलरेंस और अंतिम व्यक्ति के उदय का सपना दिखाकर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी ऐसे अनेक तीखे सवालों से घिरी है। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बंगाल चुनाव में सीएम योगी का जादू बेअसर होने तथा कोरोना काल में कुप्रबंधन को लेकर खराब हुई छबि सुधारने में जुटे नेताओं के सामने एक और चुनौती खड़ी हो गयी है। शिक्षामंत्री चर्चा में उस वक्त आये जब उनके भाई अरूण द्विवेदी को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में गरीब कोटे से असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति मिली।

पत्नी भी शिक्षक हैं और 70 हजार तनख्वाह पाती है ऐसे में पति गरीब कैसे हो सकता है। साजन गरीब और सजनी अमीर, आखिर कैसे ? हालांकि मंत्री ने पहले ही सफाई दिया था कि सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नियुक्ति हुई है, रही बात गरीब कोटे की तो मंत्री के हैसियत से उसके भाई की हैसियत नही आंकी जानी चाहिये ? भाई नही तो माता पिता की हैसियत तो बेटे की मानी जाती है, साथ ही पत्नी भी नौकरी में थी। ठीक ढंग से परिवार चलाने के लिये 70 हजार रूपये कम नही होते, बावजूद इसके किसी गरीब के हक पर डाका डालते हुये मंत्री जी ने भाई का ईवीएस प्रमाण पत्र बनवा दिया। इसमें लेखपाल से लेकर डीएम तक दोषी हैं। बताया गया डीएम ने ईवीएस प्रमाण पत्र को क्लीनचिट दिया था।

फिलहाल मंत्री के भाई ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद से इस्तीफा देकर विवादों पर विराम लगा दिया। लेकिन मंत्री की रसूख के आगे आंख मूंदकर ईवीएस प्रमाण पत्र जारी करने वाले जब तक दण्डित नही किये जायेंगे, तब तक कार्यवाही अधूरी मानी जायेगी। मंत्री कार्यवाही की जद में इसलिये आते हैं कि उन्होने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलसचिव का कार्यकाल अपने रसूख के दम पर बढ़वाया था जो 20 मई को समाप्त हो रहा था, साथ ही इस पूरे प्रकरण को जानते हुये अंजान बने रहे और उनकी रसूख पर भ्रष्टाचार जारी रहा। इससे पहले जब माध्यमिक शिक्षक संघ ने चुनावी डियूटी के दौरान जान गंवा चुके करीब 2 हजार शिक्षकों की सूची जारी कर मुंआवजे और आश्रितों के नौकरी की मांग की तो सबसे पहले सतीश द्विवेदी सामने आये।

संघ द्वारा जारी आंकड़े को झुठलाते हुये मंत्री ने महज 3 मौतों को सही बताया। उ.प्र. माध्यमिक शिक्षक संघ के मंडलीय मंत्री संजय द्विवेदी ने सतीश द्विवेदी के इस बयान को हास्यास्पद और गैर जिम्मेदाराना बताया था। कहा जारी की गयी सूची में 16 बस्ती मंडल के हैं। शिक्षक आज भी अपनी मागों पर कायम हैं। मंत्री जी से जुड़ा तीसरा मामला बेहद गंभीर और आपराधिक है। मंत्री ने अपने रसूख के दम पर सिद्धार्थनगर जिले में करोड़ों की बेशकीमती जमीन कौड़ियो के दाम पर खरीदा है। रजिस्ट्री कराने के बाद इन जमीनों की कीमत कई गुना बढ़ाने के लिये मंत्री जी ने अपनी जमीन में रोड भी बनवा लिया। यह रोड सिर्फ मंत्री के काम आयेगा। खबर है कि 365 वर्गमी. जमीन जिसकी कीमत करीब 66 लाख है उसे मंत्री जी ने 12 लाख में खरीद लिया।

ये 12 लाख भी कागजों में, जमीन बेंचने वाले के पास आज तक टीवी का संवाददाता पहुंचा तो पता चला कि मंत्री ने सिर्फ डेढ़ लाख रूपये और एक पुरानी होंडा बाइक दिया है। कौड़ियों के दाम पर इस तरह जमीन मिले तो तकदीर बदलने में कितना वक्त लगेगा ? इतना ही नही एक दूसरी जमीन जिसकी कीमत 23 लाख बताई गयी उसे मंत्री जी ने महज 8 लाख में खरीद लिया। ये दोनो जमीनें उन्होने माता कालिंदी देवी के नाम लिया। अभी भी मंत्री जी की जरूरतें और जमीन की हवस पूरी नही हुई। उन्होने 1 करोड़ 26 लाख 29 हजार की एक और जमीन खुद अपने नाम खरीदा और कीमत के नाम पर सिर्फ 20 लाख दिये।

अब आप समझ गये होंगे कि विधायक मंत्री इतने कम समय में मालामाल कैसे हाते हैं ? भ्रष्टाचार की फेहरिस्त का यहीं पर अंत नही है, अभी और कई मामले आने बाकी हैं ? हैरानी की बात ये है कि मंत्री जी यूपी में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मंत्री इस तरह भ्रष्टाचार में लिप्त होगा तो शिक्षा जैसे अति महत्वपूर्ण मंत्रालय का हस्र क्या होगा, आप अंदाजा लगा सकते हैं। पता चला है मंत्री जी अर्थशास्त्र से पीएचडी हैं। अर्थशास्त्र का ज्ञान तो काम आ रहा है, इसके साथ उन्हे ज़मीनशास्त्र और भ्रष्टाचार शास्त्र में भी पीएचडी की उपाधि मिलनी चाहिये जिससे वे अन्य मंत्रियों के सामने एक मिसाल बनें और लोगों को समझ में आये कि दिन दूना रात चौगुना तरक्की कैसे होती है और अंतिम व्यक्ति के उदय का सपना कैसे टूटता है ? प्रदेश की 24 करोड जनता एक्शन का इंतजार कर रही है, वरना जनता खुद 8 महीने बाद एक्शन लेगी।

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