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हे गंगा पुत्र, कहां हो, तुम्हे मां पुकार रही–

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अशोक श्रीवास्तव की संपादकीय- यूपी के 27 जिलों में गंगा किनारे तैर रही लाशों ने मानवीय संवदेनाओं को तार तार कर दिया है। साथ ही सरकारी तंत्र इस कदर बेनकाब हुआ है कि डैमेज कंट्रोल का कोई उपाय नही सूझ रहा है। सबका साथ सबका विकास का फेक मॉडल देख आज देशवासियों को बेहद अफसोस हो रहा है। साल 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान सवा सौ करोड़ देशवासियों को इमेशनली ब्लेकमेल करने वाले नरेन्द्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था ‘मै आया नही हूं, मुझे गंगा मइया ने बुलाया है’ मुझे सेवा का अवसर दिया है। गंगा मइया भी इमोशनली ब्लेकमेल हो गयीं।

अब मां हकीकत में बुला रही है और पुत्र अनसुना कर रहा है। उन्होने अपने पुत्र पर भरोसा कर भरपूर आर्शीवाद दिया। आज करोड़ों देशवासियों की अश्रुधारा इसी गंगा में समाहित हो रही है। अपने पुत्रों का दर्द और कदम कदम पर कराह रही मानवता गंगा मइया खुद सहन नही कर पा रही है। अपनी छाती पर हजारों लाशों का बोझ ढो रही गंगा मइया इस वक्त सिर्फ एक ही बात सोच रही होगी,

‘‘हे भगवान भोलेनाथ हमें फिर वापस अपनी जटाओं में ले लो, क्योंकि जिस कार्य के लिये धरती पर मेरा अवतरण हुआ था शायद वो कार्य नही हो पा रहे हैं। मै मानवीय संवेदनाओं को बचाने में नाकाम रही। इतने सारे पुत्रों की बेतरतीब लाशें अब हमारी छाती पर बोझ बन गयी हैं’’ ढेर सारा आर्शीवाद और प्यार लुटाकर गंगा मइया ने अपने पुत्र को सर्वोच्च स्थान पर बैठा दिया, लेकिन पुत्र आज अपनी मांग की बेबसी पर मौन है, उसे देश की जनता और गंगा मइया ने जो काम सोंपा है उससे वह मुंह मोड़ रहा है। सबकुछ जानकार अंजान बना बैठा है।

यूं तो मां का कर्ज कोई उतार नही पाया है। लेकिन जो पुत्र अपनी मां की इच्छा नही पूरी कर पाता उससे ज्यादा स्वार्थी और अभागा कोई नही हो सकता। गंगा शर्मसार हो रही है। जिस गंगा में लोग डुबकियां लगाकर अपने पाप धुलते हैं आज वह सिसकियां लगाने पर मजबूर है। वह मां है, मां के भीतर करूणा होती है लेकिन मां कठिन से कठिन दर्द को भी सहन करने की क्षमता रखती है। दुर्भाग्य तो उस बेटे का हे जिसे मां ने इतना शक्तिशाली बना दिया फिर भी वह न जाने किस अहंकार में डूबा है। मां के आंसू, उसकी बेबसी और लाचारी पर उसकी मुद्रा मौन क्यों है ?

उत्तर प्रदेश के 27 जिलों में बहती मां गंगा की धाराएं शायद यही दर्द बयां कर रही हैं। कोरोना से मरने वालों की लाशों को दफन कर जो सच्चाई छिपाने की कोशिश की गई, उन्हें मां गंगा ने खुद बाहर निकाल दिया। यूपी के कानपुर, कन्नौज, उन्नाव, गाजीपुर और बलिया में हालात बेहद खराब मिले। कन्नौज में 350 से ज्यादा लाशें दफन हैं। प्रशासन इन पर मिट्‌टी डलवा रहा है, ताकि कोई देख न सके। कानपुर के शेरेश्वर घाट पर आधा किलोमीटर में ही 400 से ज्यादा लाशें दफन हैं। कुछ को कुत्ते नोंचते दिखे तो कुछ लाशों पर चील और कौवे बैठे नजर आए।

उन्नाव में रेत में दो जगहों पर 900 से ज्यादा शव दफन किये गये हैं। कोरोनाकाल में देश का सबसे बड़ा श्मशान उन्नाव में ही बना है। यहां के शुक्लागंज घाट और बक्सर घाट के पास करीब 900 से ज्यादा लाशें दफन हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक यहां कदम-कदम पर मानव अंग बिखरे नजर आए। कुत्ते किसी का हाथ नोंच रहे थे, तो किसी का पैर। खुलासे के बाद प्रशासन नींद से जागा और आनन-फानन में सभी लाशों से कफन हटवाकर रेत डलवा दी गई। इसी तरह फतेहपुर में 20 शव दफन मिले। उन पर प्रशासन ने मिट्‌टी डलवा दी।

संगमनगरी प्रयागराज से अब तक 13 शवों को गंगा और यमुना नदी से निकाला गया है। इनमें से तीन लाशें सुसाइड करने वालों की थी। पुलिस ने 10 लाशों का अंतिम संस्कार करा दिया है। चंदौली के बड़ौरा गांव में गंगा घाट पर दो दिन के अंदर 12 से ज्यादा लाशें नजर आईं। पुलिस ने इन सभी लाशों को दफन करवा दिया। वाराणसी के सूजाबाद इलाके में गंगा किनारे एक साथ 7 शव मिले। पूर्वांचल के गाजीपुर में 110 से ज्यादा लाशें देखी गयीं। पुलिस ने सभी लाशों को निकलवाकर दफन करवा दिया। लेकिन अब भी शवों का मिलना लगातार जारी है। हर रोज करीब 10 से 12 लाशें मिल रहीं हैं। बलिया में अब तक 15 लाशें मिलीं। इन लाशों को प्रशासन ने घाट किनारे ही गड्‌डे खुदवाकर दफन करवा दिया।

हे गंगा पुत्र! अब तो जागो। क्या वादा किया था मां से और क्या कर रहे हो ? खुद सोचो क्या एक पुत्र का मां के प्रति यही कर्तव्य है ? कम से कम भारत में तो ऐसा नही होता। मां के आखों में आंसू देख बेटा बिह्वल हो जाता है और सारी सीमायें तोड़कर सिर्फ मां के चेहरे पर खुशी देखने के लिये वह सबकुछ करने का तैयार हो जाता है ? तुम किस मिट्टी के बने हो, तुम मेरे पुत्र नही या मै तुमहरी मां नही ? या फिर ये रिश्ता मां के आर्शीवाद तक ही सीमति है ? उठो जागों मां पुकार रही है, उसकी छाती पर अनगिनत लाशों के बोझ और धारा में समाहित हो रही असंख्य अश्रुधारा अब बर्दाश्त नही हेती। पुत्र उठो और अपना वादा याद करो ? क्या फिर तुम्हे मेरे आर्शीवाद की जरूरत नही है ? यदि है तो उठो जागो, अपनी मां के आूसं पोछ लो!

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