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आलू की अच्छी फसल को कीट एवं रोगों से बचाना जरूरी

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बस्तीः संयुक्त निदेशक औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण, ने बताया है कि जनपद में आलू की पर्याप्त उपज हेतु समसामयिक महत्व के कीट एवं रोगों का समय पर नियंत्रण नितान्त आवश्यक है। आलू की फसल (अगेती, पिछेती) झुलसा रोग के प्रति संवेदनशील होती है। विशेषकर बदलीयुक्त बूदा-बॉदी एवं नम वातावरण में झुलसा रोग तेजी से फैलता है।

उन्होने बताया कि आलू उत्पादक किसान अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए झुलसा रोग से फसल की बचाव करें। झुलसा रोग आलू की निचली पत्तियों से प्रारम्भ होता है। पत्तियों पर गहरें भूरे, काले रंग के छल्लेनुमा धब्बे बनते है, जो बाद में बीच में सूखकर टूट जाते है और प्रभावित पत्तियॉ सूखकर गिर जाती है। उन्होने बताया कि झुलसा रोग आलू की फसल में बड़ी तीव्रगति से फैलता है और दो से चार दिनों के अन्दर पूरी फसल नष्ट हो जाती है। झुलसा रोग से बचाने के लिए जिंक मैगनीज कार्बोनेट 2.0 से 2.5 क्रिग्रा0 को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से पहले रक्षात्मक छिड़काव अवश्य करें।

रोग नियंत्रण हेतु दूसरा एवं तीसरा छिड़काव कापर आक्सीक्लोराइड 2.5 से 3.0 किग्रा0 अथवा जिंक मैगनीज कार्बोनेट 2.0 से 2.5 क्रिग्रा0 में से किसी एक रसायन को 800 से 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से 10 से 12 दिनों के अन्तर पर छिड़काव करें। आलू की फसल में मॉहू कीट का नियंत्रण करने के लिए दूसरे एंव तीसरे छिड़काव में फफूदनाशक के साथ ही कीटनाशक रसायन जैसे डायमेथोएट, 30 ईसी या मिथाएल ओ डेमेटान 25 ईसी 1.00 लीटर अथवा मोनोक्रोटोफॉस 36 ईसी 750 मिमी0 को प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें, जिससे आलू उत्पादक किसान भाईयों को अच्छा उत्पादन प्राप्त हो सकें।

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